सुंदरकांड पाठ हिंदी PDF | Sunderkand Hindi PDF Download by Gita Press Gorakhpur

PDF Nameसुंदरकांड पाठ हिंदी में अर्थ सहित | Sunderkand Hindi Lyrics PDF
No. of Pages158
PDF Size1.7 MB
LanguageHindi
PDF CatagoryReligion & Spirituality
SourceGeeta Press, Gorakhpur
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सुंदरकांड क्या है | What Is Sunderkand in Hindi

हनुमान जी के माता अंजनी हनुमान जी को प्यार से “सुंदर” नाम से बुलाते है, और महर्षि बाल्मीकि इस नाम को चुनते हुए, हनुमान जी के द्वारा लंका में जो कांड हुआ था उसका नाम सुंदरकांड रख दिया।

सुंदर कांड श्री रामचरित मानस का पंचम कांड है, जिसको रामायण में ऋषि वाल्मीकि ने सबसे पहले संस्कृत भाषा में लिखा था। इसके बाद जब तुलसीदास जी ने “रामचरितमानस” लिखा, तो सुंदरकांड का यह हिंदी रूप हमारे सामने आया।

सुंदरकांड में हनुमान जी के द्वारा लंका में किए गए सारे घटनाओं के बारे में वर्णन किया गया है, इसके साथ साथ हनुमान जी के स्वरूप, उनके जीवनकाल, उनके स्वभाव-चरित्र, गुण और आदर्शों के बारे में वर्णन किया गया है।

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सुंदरकांड पाठ के फायदे | Benefits of Chanting Sunderkand

सुंदरकांड पाठ हिंदी Sunderkand Hindi PDF Download
सुंदरकांड पाठ हिंदी – Sunderkand Hindi PDF Download

सुंदरकांड का नियमित पाठ करने से बहुत सारे फायदे मिलते हैं, जैसे कि –

  • सुंदरकांड का हर दिन 45 मिनट तक जप करने से जीवन की हर मनोकामनाएं पूरी होती है।
  • अगर किसी व्यक्ति के जीवन में बहुत परेशानियां आ रही है, और वह आत्मविश्वास की कमी महसूस कर रहे हैं, तो सुंदरकांड के पाठ से यह दूर हो सकती है।
  • जीवन में हर सफलता को प्राप्त करने के लिए सुंदरकांड पाठ आपको अंदर से प्रेरित करता हैं।
  • सुंदरकांड का नियमित पाठ हर परेशानियों को आप और आपके परिवार से दूर रखते हैं।
  • इसके बाद से आपका मन भय और अन्य सभी तरह के नकारात्मक विचारों से मुक्त होता है।
  • सुंदरकांड का प्रतिदिन पाठ से आपका जीवन हर रूप से सुख और समृद्धि से परिपूर्ण होता है।

सुंदरकांड हिंदी लिरिक्स पाठ | Sunderkand – Lyrics in Hindi

1 : जगदीश्वर की वंदना

शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहंकरुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्॥1॥

अर्थ: शान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाणों से परे), निष्पाप, मोक्षरूप परमशान्ति देने वाले, ब्रह्मा, शम्भु और शेषजी से निरंतर सेवित, वेदान्त के द्वारा जानने योग्य, सर्वव्यापक, देवताओं में सबसे बड़े, माया से मनुष्य रूप में दिखने वाले, समस्त पापों को हरने वाले, करुणा की खान, रघुकुल में श्रेष्ठ तथा राजाओं के शिरोमणि राम कहलाने वाले जगदीश्वर की मैं वंदना करता हूँ॥1॥

2 : रघुनाथ जी से पूर्ण भक्ति की मांग

नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा। भक्तिं प्रयच्छ रघुपुंगव निर्भरां मे कामादिदोषरहितंकुरु मानसं च॥2॥

अर्थ: हे रघुनाथजी! मैं सत्य कहता हूँ और फिर आप सबके अंतरात्मा ही हैं (सब जानते ही हैं) कि मेरे हृदय में दूसरी कोई इच्छा नहीं है। हे रघुकुलश्रेष्ठ! मुझे अपनी निर्भरा (पूर्ण) भक्ति दीजिए और मेरे मन को काम आदि दोषों से रहित कीजिए॥2॥

3 : हनुमान जी का वर्णन

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तंवातजातं नमामि॥3॥

अर्थ: अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन (को ध्वंस करने) के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान् जी को मैं प्रणाम करता हूँ ॥3॥

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4 : जामवंत के वचन हनुमान् जी को भाए

चौपाई :

जामवंत के बचन सुहाए, सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥ तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई, सहि दुख कंद मूल फल खाई ॥1॥

अर्थ: जामवंत के सुंदर वचन सुनकर हनुमान् जी के हृदय को बहुत ही भाए। (वे बोले-) हे भाई! तुम लोग दुःख सहकर, कन्द-मूल-फल खाकर तब तक मेरी राह देखना ॥1॥

5 : हनुमान जी का प्रस्थान

जब लगि आवौं सीतहि देखी, होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी॥ यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा, चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा ॥2॥

अर्थ: जब तक मैं सीताजी को देखकर (लौट) न आऊँ। काम अवश्य होगा, क्योंकि मुझे बहुत ही हर्ष हो रहा है। यह कहकर और सबको मस्तक नवाकर तथा हृदय में श्री रघुनाथजी को धारण करके हनुमान् जी हर्षित होकर चले ॥2॥

6 : हनुमान जी का पर्वत में चढ़ना

सिंधु तीर एक भूधर सुंदर, कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥ बार-बार रघुबीर सँभारी, तरकेउ पवनतनय बल भारी ॥3॥

अर्थ: समुद्र के तीर पर एक सुंदर पर्वत था। हनुमान् जी खेल से ही (अनायास ही) कूदकर उसके ऊपर जा चढ़े और बार-बार श्री रघुवीर का स्मरण करके अत्यंत बलवान् हनुमान् जी उस पर से बड़े वेग से उछले॥3॥

7 : पर्वत का पाताल में धसना

जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता, चलेउ सो गा पाताल तुरंता॥ जिमि अमोघ रघुपति कर बाना, एही भाँति चलेउ हनुमाना॥4॥

अर्थ: जिस पर्वत पर हनुमान् जी पैर रखकर चले (जिस पर से वे उछले), वह तुरंत ही पाताल में धँस गया। जैसे श्री रघुनाथजी का अमोघ बाण चलता है, उसी तरह हनुमान् जी चले॥4॥

8 : समुन्द्र का हनुमान जी को दूत समझना

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी, तैं मैनाक होहि श्रम हारी॥5॥

अर्थ: समुद्र ने उन्हें श्री रघुनाथजी का दूत समझकर मैनाक पर्वत से कहा कि हे मैनाक! तू इनकी थकावट दूर करने वाला हो (अर्थात् अपने ऊपर इन्हें विश्राम दे)॥5॥

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सुंदरकांड पाठ की विधि | Process of Chanting Sunderkand

सुंदरकांड पाठ के सटीक विधियां आपको जरूर जाना चाहिए, क्योंकि गलत तरीकों से इसका पाठ आपको लाभ के जगह नुकसान दे सकता है। इसके सटीक विधियां है-

  • सुंदरकांड के नियमित पाठ करने के लिए आप एक स्वच्छ और सुंदर जगह चुनिए।
  • वहां थोड़ा सा ऊंचे स्थान पर हनुमान जी के प्रतिमा या उनके तस्वीर स्थापित करें।
  • सिंदूर और चमेली के तेल को एक साथ मिलाकर हनुमान जी का तिलक करें।
  • हनुमान जी के चरण में पीपल के सात पत्ते अर्पण करें और एक दीपक जलाकर उनके पास स्थापन करें।
  • हनुमान जी के सामने लड्डू और उनके पसंदीदा और फल आदि का भोग अर्पण करें।
  • सबसे पहले गणेश जी, श्री राम जी और शिव जी के ध्यान करके आवाहन करें।
  • और उसके बाद हनुमान जी का स्मरण करें और सुंदरकांड पाठ आरंभ करें।
  • पाठ संपूर्ण होने के बाद प्रसाद का वितरण करें।

सुंदरकांड पाठ के सही नियम | Right Process to Chant Sunderkand

अब सुंदरकांड पाठ के कुछ सटीक नियम जान ले –

  • सुंदरकांड का पाठ दोपहर के समय में ना करें।
  • सुंदरकांड का पाठ करते समय बीच में कभी उठना नहीं चाहिए।
  • इसके पाठ चलते समय कभी दूसरों से बात नहीं करना चाहिए।
  • खान पान के रूप में कोई तामसिक चीजों का प्रयोग ना करें।
  • सुंदरकांड का पाठ मंगलवार, शनिवार, पूर्णिमा और अमावस्या तिथि में करना सबसे उत्तम होता है।
  • सुंदरकांड का पाठ प्रातः काल या संध्या के समय में करना सबसे अच्छा माना जाता है।
  • पाठ शुरू करने से पहले मन से हनुमान जी का आवाहन, और संपूर्ण करने के बाद उनका समापन विदाई अवश्य करना चाहिए।

Download Sunderkand Lyrics Hindi PDF | सुंदरकांड लिरिक्स डाउनलोड हिंदी पीडीएफ गीता प्रेस गोरखपुर

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FAQs – Sunderkand Lyrics Download In Hindi

1. सुंदरकांड लिरिक्स हिंदी में कहां से डाउनलोड करें – From Where Can I Download Sunderkand Lyrics In Hindi?

सुंदरकांड का हिंदी लिरिक्स आप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं – you can Download Sunderkand Hindi Lyrics from here.

2. सुंदरकांड हिंदी पाठ करने के फायदे क्या है – What are the Benefits of Chanting Sunderkand Hindi?

सुंदरकांड पाठ करने के सारे फायदे और नुकसान जहां से जान ले।

3. सुंदरकांड हिंदी लिरिक्स कैसे डाउनलोड करें – How to Download Sunderkand in Hindi?

सुंदरकांड हिंदी पीडीएफ आप इस पोस्ट में डाउनलोड कर सकते हैं – you can Download Sunderkand Hindi PDF from this post.

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